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दुआएँ पाया करते हैं

Sooba Lal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जीत लेते हैं सभी के दिल,
        
                                                    
                            
जो प्यार से बातें करते हैं,
बन जाते हैं वे अपने ही,
जो सेवा उनकी करते हैं।

उठा लेते हैं जो गिरते को,
सहारा देकर हाथों का,
प्यार से मुस्कुराकर उनसे,
दुआएँ पाया करते हैं।

अंधे का पकड़ करके हाथ,
करा दे जो पार पगडंडी,
खिला दे अन्न जो भूखे को,
वही सुख पाया करते हैं।

दिखे चेहरे पर किसी के दर्द ,
मिटा दे उसको जो कोई,
वही हमदर्द होते हैं
जो आंसू पोछा करते हैं।

सेवा से बड़ा न धर्म है कोई
प्रेम से बड़ा न दान है कोई।
जो खुशियाँ बाँट दे जग में,
उससे बढ़कर इंसान न है कोई।
— सूबा लाल "अंजाना"
एक महीने पहले
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