विज्ञापन

बरगद का पेड़

Sooba Lal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जंगल का विशाल बरगद, खुद में समाया है,
        
                                                    
                            
अनगिनत जीवों के जीवन का सहारा बन आया है।
उसके ही फलों को खाकर, चिड़ियों का संसार बसा है,
उसकी हर शाख पर जैसे, जीवन का विश्वास बसा है।

अनगिनत पंछियों ने उस पर, अपने नीड़ बनाए हैं,
उसकी शीतल छाया में, सुख के दिन कई बिताए हैं।
उसकी शाखों पर पलते हैं, कितने जीवन के सपने,
उसको ही अपना घर मानें, सारे परिंदे अपने।

जिस दिन गिरेगा वृक्ष, न जाने कितने घर गिरेंगे,
कितने नन्हे पंख अचानक, बेघर होकर बिखरेंगे।
कितनी आँखें रोएँगी, कितनों के आँसू बहेंगे,
कितने भूखे जीव भटकेंगे, कितने दर्द सहेंगे।

छिन जाएगी शीतल छाया, धूप सताएगी तन को,
कौन सहारा देगा तब उन नन्हे-नन्हे मन को?
कौन गिनेगा भूख से तड़पते जीवों की पीड़ा,
कौन सुनेगा टूटे सपनों की करुण पुकारें तीखी?

बरगद केवल पेड़ नहीं है, जीवन का आधार है,
उसकी हर शाख पर टिका, कितनों का संसार है।
जो दूसरों के लिए जिए, उसका जीवन धन्य है,
परहित में जो मिट जाए, वही महान पुण्य है।

याद रखो, जब कोई अपना सहारा खोता है,
उसके साथ न जाने कितनों का सपना रोता है।
इसलिए किसी के अस्तित्व को तुच्छ कभी मत जानो,
जो सबको आश्रय देता हो, उसका मूल्य पहचानो।
-सूबा लाल "अंजाना"
एक घंटा पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Updesh Kumar

13122 कविताएं

View Profile

Ankit Kumar

10908 कविताएं

View Profile

Anil Pandey

476 कविताएं

View Profile

विजय कुमार

177 कविताएं

View Profile

Sanjai kumar

142 कविताएं

View Profile

Saurabh Joshi

9 कविताएं

View Profile

Dn Chaubey

7396 कविताएं

View Profile