ले आए तोरण, उतार लाए पर्दे...
कई खिड़कियां, कुछ दरवाजे वहीं रह गए
उनके मोहक नजारे वहीं रह गए
ले आए तस्वीरें साथ में...
मगर बच्चों की कलाकारी, वो रंग..
दीवारों पर ही रह गए
रख लाए कप प्लेट, साथ ले आए बर्तन
मगर चाय के कुछ धब्बे रसोई में ही रह गए
ले आए पौधे, सब फूलवारी
वो छत, उस पर गमलों के निशान वहीं रह गए
ले आए सामान साथ में
कुछ किस्से- कहानियां, कई गलियां,
वहां की हवा
पड़ोस का वो पेड़,
पेड़ पर चिड़िया
चिड़िया का घोंसला
और हमारा घर
सब वहीं रहे गए!
-सोनम शर्मा 'स्वरा'