जवाब भरा सवाल जब माँ एक बार सांस में कई बार दोहरा जाती है
समय आसान बन जाता है और रिश्ते की गहराई समझा जाती है
कभी नाराज़ कभी दुलार कभी डांट कभी सत्कार
हर भाव न जाने कैसे इतनी बखूबी जताती है
तुम्हारा आँचल काफी था माँ आज कोई छत उस से बड़ा नहीं
तुम्हारी आँखे ही काफी थी आज किसी रिश्ते का दर रहा नहीं
झूठी कहानियों से सच्चे सपने दिखा जाती है
ना जाने कैसे हलकी फुलकी बातों से जिंदगी की गहराई समझा जाती है
न भूक पता थी न प्यास का पता था
हर बार अपना दाना हमें खिला जाती है
खुद को हमेशा त्याग हमें इतना बड़ा बनती है
समय आसान बन जाता है जब माँ अपने साये का एहसास दिला जाती है
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