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इक माँ ही तो है

Anonymous User

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जवाब भरा सवाल जब माँ एक बार सांस में कई बार दोहरा जाती है
        
                                                    
                            
समय आसान बन जाता है और रिश्ते की गहराई समझा जाती है

कभी नाराज़ कभी दुलार कभी डांट कभी सत्कार
हर भाव न जाने कैसे इतनी बखूबी जताती है

तुम्हारा आँचल काफी था माँ आज कोई छत उस से बड़ा नहीं
तुम्हारी आँखे ही काफी थी आज किसी रिश्ते का दर रहा नहीं

झूठी कहानियों से सच्चे सपने दिखा जाती है
ना जाने कैसे हलकी फुलकी बातों से जिंदगी की गहराई समझा जाती है

न भूक पता थी न प्यास का पता था
हर बार अपना दाना हमें खिला जाती है
खुद को हमेशा त्याग हमें इतना बड़ा बनती है

समय आसान बन जाता है जब माँ अपने साये का एहसास दिला जाती है


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6 वर्ष पहले
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Anil Pandey

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