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मुर्शिद ये तो चलता रहेगा

Siraj Ali

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तू आए या ना आए
        
                                                    
                            
देते रहेंगे तुझे सदाएं
अपनी कहानी बस इतनी है
तेरी जफाएं मेरी वफाएं

मुर्शिद ये तो चलता रहेगा

तू तो मेरा हाल न जाने
हम ही तुझको अपना माने
सदी सदी और जन्म जन्म तक
फेर ले चाहें मुझसे निगाहें

मुर्शिद ये तो चलता रहेगा

एक है तू और हम कितने हैं
सभी तो तुझ पर मर मिटने हैं
तेरी चाहत में जो डूबा
उठते उसपे 100 फितने हैं

मुर्शिद ये तो चलता रहेगा

आंखें मेरी नीर है तेरा
दिल है मेरा दर्द है तेरा
तू है जैसे उगता सूरज
मैं ही हूं घनघोर अंधेरा

मुर्शिद ये तो चलता रहेगा

मुर्शीद खुद में ही खोया है
बंदा रोया तो क्या रोया है
मुर्शिद का भी मुर्शिद है
तभी तो वह मुर्शिद होया है

मुर्शिद ये तो चलता रहेगा

खुशियों की एक तमन्ना है
गमों का एक समंदर है
मुर्शीद है और नहीं भी है
मुर्शिद मेरे ही अंदर है

 - हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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