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माँ की ममता

Sima Kedia

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            माँ तुम ममता की मूरत हो,
        
                                                    
                            
मेरे जीवन की दर्पण हो।
तुम हो तो ये जीवन सुंदर है,
तुम बिन सूना ये संसार है।

आज भी तुम्हारे हाथों से बनी ,
रोटी खाकर जो सुकून मिलता था,
कितना भी अच्छा खाना खा लो,
तुम्हारे हाथों का स्वाद याद आता है।

जब रोटी बेलते वक्त चकले पर ,
तुम्हारे चूडियों की छन छन बजती थी।
पूरे रसोई घर में एक मधुर,
ध्वनि की गूँज सुनाई पड़ती थी।

मेरी छोटी छोटी ख्वाहिशों को पूरा करती,
तुम्हारे आँचल के आगे पीछे मैं घूमती।
आज ईश्वर की कृपा से सब कुछ है,
पर आँचल का पकड़ने वाले हाथ उदास हैं।

कहाँ गए वो सुनहरे दिन ,इठलाते लम्हें,
वो मस्ती भरी दुनिया हँसता संसार।
शादी के बाद वंचित हो जाते बहनें
छूटता जा रहा है वो माँ का प्यार।
-सीमा केडिया
एक वर्ष पहले
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