विज्ञापन

जीवन की उलझन

Sima Kedia

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जीवन की उलझन सुलझा दो कान्हा,
        
                                                    
                            
डूबती मेरी नैया पार लगा दो कान्हा,
दुविधा में हूँ कैसे निकलूँ बाहर,
तुम ही तो मेरे सहारे, मेरे हमदम।

रात दिन जपती मैं तेरा नाम कान्हा,
तेरे ही भरोसे चलती मेरी जिंदगी।
सुख सुविधा को मैं तेरी कृपा मानती,
दुख तकलीफ को प्रसादी जानती।

हर वक्त मैं तुमसे कुछ माँगती रहती,
पर तुम्हें जो उचित लगता, वही देते।
मेरा हर समय तुम ख्याल रखते,
किसी के सामने शर्मिंदा नहीं होने देते।

तेरी मेहरबानी की मैं आभारी हूँ,
मेरी जिह्वा पर हर वक्त तेरा नाम है।
सीमा पर कृपा ऐसे ही बनाये रखना कान्हा,
मेरी भूलचूक को दरकिनार करना कान्हा।

- सीमा केडिया
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all