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अजनबी शहर

Sima Kedia

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            नया शहर ,नई दुनिया,
        
                                                    
                            
दूर से देखने में खूबसूरत,
वो कैनाल की रौनक,
विभिन्न फूलों से गुलजार,
पत्तों की तेज सरसराहट
पर मिजाज एकदम शांत,
महसूस होता सूनापन,
किसी से नहीं कोई बातचीत,
नहीं कोई मेल मिलाप,
सभी सिर्फ अपने में व्यस्त,
मुश्किल से सुनती संगीत की धुन,
कब रात हो जाये
पता ही नहीं चलता,
घड़ी देखकर सारा काम होता।
चाट पुचका भी रेस्टोरेंट में खाओ,
एक का चार गुना दाम लगाओ,
मुड़ी का खोमचा दिखा नहीं,
गन्ने का रस मिला नहीं।

विश्व का यह शहर नहीं आया रास,
बस कुछ दिन घूमने को खास,
हम भारतीय हो हल्ले में रहनेवाले,
उन्हें ये सब नहीं लुभाने वाले,
चार लोगों के बीच बैठना,
मंदिर द्वारे जाते रहना,
गंगा यमुना में डुबकी लगाना,
मंत्रोच्चार की ध्वनि सुनना,
गर्म जलेबी कचौड़ी का नाश्ता,
मेरे को बहुत ही याद आता,
महीने दो महीने की बात निराली,
मुझे तो अपने देश की याद आली।

-सीमा केडिया
2 महीने पहले
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