कुछ यूँ इस तरह महसूस करते हैं
जैसे रेगिस्तान में दूर से आता हुआ प्यासा उंट
जो अपने कंधो पर तमाम बोझ लिये
धीरे-धीरे चलते-चलते आ रहा हो।
फिर भी दूर दूर तकल सिर्फ रेतीली जमीन
के सिवा कुछ दिखाई नहीं दे रहा होता है
आंखो मे आशा,होंठो पर प्यास लिये
चले आ रहा है जैसे इस उम्मीद से की
अब कहीं तो होंठो का रुखापन खत्म होगा।
कुछ इस तरह महसूस करते हैं
जैसे रेगिस्तान में दूर से आता हुआ प्यासा उंट
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