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पर्यावरण राग

Shubham Yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कौन सी सिटी तेरा कौन सा शहर ।
        
                                                    
                            
दिल्ली की हवा में घुला है जहर ।
इस जहर का जनता में मचा है कहर ।
केजरीवाल फिर से ऑड-ईवन लाए हैं ।
ऑड-ईवन में दिखता है, केजरी को जीवन ।
सुबह के 8 से शाम के 8 तक ।
सडकों में चलेंगे अब मास्क पहनकर ।
इनके वादो में नहीं दिखता है दम ।
लेकिन अब जनता उठाएगी कदम ।
सबको बताएगी जनता का दम ।
गांधी के नाम पर अभियान चलाएंगे ।
पूरे भारत को ये स्वच्छ बनाएंगे ।
जनता को है इसमें भी भ्रम, दशको में
दिख जाए तो बड़ी बात है, भारत सरकार का ये कदम ।
इनको तो जीवन, घास दिखती है ।
पानी डालो ऊपर से धूल हटती है ।
ऑड-ईवन से दिल्ली बचाएंगे ।
कल- कारखानों को खूब बढाएंगे ।
सामान्य जनता का निकालेंगे ये दम ।
उद्योगपतियों के प्रति तेवर दिखेंगे नरम ।
क्योंकि स्वच्छ पर्यावरण तो एक बहाना है ।
इनको तो पुनः कुर्सी को पाना है ।
हे! बेबी-
कौन सी सिटी तेरा कौन सा शहर ।
दिल्ली की हवा में घुला है जहर ।
चिंता मत करो, नेताओं का तो यही एक काम है ।
उद्योगपतियों से ही चलती, इनकी दुकान है ।
वो क्या है-
इनसे ही मिलता है इनको खजाना ।
इनको तो बस अपनी झाडू को जिताना ।
अबकी बार न लड़ेंगे 'आप '।
लड़े तो समझो कर दिया पाप ।
इस पाप से जो बचना है, तो उठाओ ये कदम ।
उठाओ अपनी झाडू और कर दो प्रदूषण खतम ।
और कुछ न-सही-तो-न-सही ।
जनता पर कर दो इतना सा रहम ।
हांथ जोड़कर शुभ कहे अब कर दो प्रदूषण खतम ।
अब क्या कलम ही बोलेगी या जनता भी बोलेगी ।
कब तक हाथ में हांथ धरे बैठेगी ।
मेरी कलम से निकली है जो ये दम ।
अब हथियार बन जनता का दिखाएगी दमखम ।
लिखना तो सिर्फ एक बहाना है ।
हमको तो अपना भविष्य बचाना है ।
नेता लोग थोड़ा इधर ध्यान दे लो ।
अपनी बड़ी- बड़ी आंखे और मस्तिष्क के कपाट ये खोलो ।
स्वच्छ पर्यावरण, जनता की ये सबसे बड़ी मांग है ।
पूरा न करोगे तो आपका ही नुकसान है ।
गहराई तक न अब जाएंगे हम ।
क्योंकि-
हम जानते है इन नेताओं में कितना है दम ।
अब बस भी करो शुभ यहीं से रोकते हैं हम अपनी महान कलम ।।

शुभ ।।।



हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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