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उनसे मुलाक़ात हो गई

Shreyasi Satish

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कल सपने में ही उनसे मुलाक़ात हो गई,
        
                                                    
                            
क्या बताऊं ऐ सबा, क्या-क्या बात हो गई।

देखा जो ख़्वाब मैंने, कि वो मेरे हो गए हैं,
गुलफ़िशाँ सी महकती मेरी हयात हो गई।

फिर आई ऐसी आंधी, उजड़ गया गुलशन,
यूँ लगा जैसे दिन में ही घनी रात हो गई।

तन्हाई ही बनी है अब साथी मेरे ग़म की,
थमी नहीं झड़ी, आँखों से बरसात हो गई।

बंद पलकों पर जब पड़ने लगी शुआएँ,
टूट गई नींद हक़ीक़त की शुरुआत हो गई।
3 महीने पहले
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