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रंग बदला किसी ने

Shreyasi Satish

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            याद मत करो उसे जो भूल गया है तुम्हें,
        
                                                    
                            
मत सोचो कि क्या खोया क्या मिला तुम्हें।

रंग बदला किसी ने तो हैरत की बात क्या,
शुक्र है वक़्त का, जिसने संभाला तुम्हें।

टूटकर डाली से फूल फिर खिल हीं जाते हैं,
कुदरत का यह दस्तूर क्या समझ न आया तुम्हें?

जब अपनी ही परवाज़ से छू लिया आसमाँ तुमने,
तो अब कोई और क्या अपनी ताक़त दिखाएगा तुम्हें!
2 महीने पहले
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Manju Sharma

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