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वक्त हो चला!

Shreya Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उठो नारी! तुम शस्त्र उठाओ,
        
                                                    
                            
अब न कान्हा आएंगे;
अपनों का मुखौटा पहने,
वो दरिंदे वापस आएंगे।

उठा कर शस्त्र,
आवाज़ भी ऊंची करनी होगी;
बनना दुर्गा होगा,
गर इज़्ज़त प्यारी होगी।

याद करो लक्ष्मीबाई को,
क्यों वो वीरांगना कहलाईं?
क्यों उनकी गाथा दुनिया ने,
हर दौर में गाकर दोहराईं?

जब प्रेम नहीं, बस धोखे से
करना चाहे वो तुम्हें हासिल,
तब बनना खुद ही ब्रह्मास्त्र,
जब न कोई दूजा शामिल।

न मूक अब सहते जाना,
न केवल परीक्षा देना तुम;
त्याग और बलिदान से आगे बढ़कर,
खुद ही रक्षक बनना तुम।

सच्चाई से रूबरू अब पूरी दुनिया होगी,
तेरे ही हाथों से नई कहानी लिखी होगी;
वीरांगना बन संहार करो, अब छोड़ो सब अबला कहना—
उठो नारी! हुंकार भरो, क्योंकि अब तो वक्त हो चला!
-श्रेया सिंह
16 घंटे पहले
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