विज्ञापन

वक्ररेखा गणेश जी

Shreya Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            टेढ़ी-मेढ़ी रेखाओं में,
        
                                                    
                            
जब कोई चित्र उभरता है,
हर मोड़ पर गणपति का
एक नया रूप निखरता है।

न कोई सीधी राह मिली,
न जीवन रहा सरल,
पर बप्पा ने हर वक्र मोड़ पर
थाम लिया मेरा हाथ अचल।

सूंड की उस वक्र रेखा में,
बुद्धि का उजियारा है,
छोटे-से उस रूप में देखो,
पूरा जगत समाया है।

जहाँ रेखा रुक जाती है,
वहीं राह नई बनती है,
गणपति की कृपा हो तो
हर मुश्किल भी हल बनती है।

हे वक्रतुंड, हे मंगलमूर्ति,
मेरे मन में दीप जला देना,
जीवन की हर टेढ़ी राह को
सच्चाई से सजा देना।

वक्र रेखा चाहे जितनी हो,
मंज़िल उससे दूर नहीं,
जिसके संग हों गणपति बप्पा,उसके जीवन में कोई मजबूरी नहीं।
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3561 कविताएं

View Profile