सावन की रिमझिम फुहारों में,आज फिर भोले की याद आई,मंदिर की घंटी गूँज उठी,मन ने शिव से आस लगाई।
बेलपत्र की हर एक पत्ती में,
छुपी हुई है भक्ति सारी,
ॐ नमः शिवाय की धुन में,
महक उठी दुनिया हमारी।
माथे पर चंदन सजा लिया,
हाथों में पूजा की थाली,
शिवलिंग पर जल चढ़ाते ही,
मिट गई मन की हर बदहाली।
हे नीलकंठ, बस इतनी कृपा,हर दिल में विश्वास रहे,जिस घर में हो आपका नाम,वहाँ सुख का निवास रहे।
जो माँगा है मन से हमने,
वो आपकी इच्छा पर छोड़ दिया,आपने जो भी दिया भोले,हमने उसे प्रसाद समझ लिया।
सावन का ये दूसरा सोमवार,
भक्ति का संदेश सुनाए,
जिसके सिर पर हाथ हो शिव का,उसका जीवन मुस्काए।
हर हर महादेव की गूँज रहे,
मन में शिव का धाम रहे,
सावन की हर एक बूंद में,
भोलेनाथ का नाम रहे।