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मुरली की पुकार

Shreya Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जब-जब मन का दीप बुझे, तुम बाँसुरी बन आ जाना,
        
                                                    
                            
सूनी साँसों की गलियों में, मधुर सुरों को बरसा जाना।

श्याम सलोने चरण तुम्हारे, हर दुख का हैं एक किनारा,
डूब रही इस जीवन-नैया का, तुम ही बनना दृढ़ सहारा।

मोर मुकुट की शीतल छाया, तपते मन को ठंडक देती,
तेरी मीठी मुस्कानों से, हर उलझी तक़दीर सँवरती।

राधा-राधा गूँजे मन में, प्रेम सुधा फिर झरने लगती,
तेरे नाम की एक रटन से, सूखी डाली भी हरियाती।

गीता का हर एक उपदेश, जीवन का आधार बनाता,
कर्म-पथों की कठिन डगर में, सत्य का दीपक जलवाता।

हे गिरिधर बस इतनी कृपा, मन अभिमान से दूर रहे,
हर धड़कन में तेरा नाम हो, हर साँस तुझमें ही भर रहे।

माखन-चोर मेरे आँगन में, प्रेम का उत्सव ले आना,
जब-जब मन का दीप बुझे, तुम बाँसुरी बन आ जाना।
2 महीने पहले
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