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माँ लक्ष्मी – समृद्धि का उजियारा

Shreya Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कमल-आसन पर विराजित माता, मुख पर दिव्य प्रकाश,
        
                                                    
                            
तेरे चरणों में शीश झुकाएँ, लेकर मन में विश्वास।

स्वर्णिम आभा, कर में कलश, अमृत की बरसात,
तेरी कृपा से खिल उठती है, सूनी जीवन-रात।

जहाँ श्रम की पूजा होती है, जहाँ सत्य का वास,
वहीं पधारती माँ लक्ष्मी बनकर सुख की आस।

केवल धन की चाह नहीं माँ, दे ऐसा वरदान,
धन के संग संतोष भी देना, निर्मल रखना मन-प्राण।

जिस घर में हो प्रेम आपसी, मीठे हों व्यवहार,
उस आँगन में माँ लक्ष्मी का, रहता सदा संचार।

अहंकार का दीप न जलने दे, लोभ न मन में आए,
मेहनत की रोटी मीठी करके, जीवन सफल बनाए।

जिसके घर में अन्न न हो माँ, उसके घर भंडार भर देना,
जिसके नयनों में आँसू हों, उसके दुख हर लेना।

विद्या देना, बुद्धि देना, देना सच्चा ज्ञान,
तेरी कृपा से नेक बने माँ, हर मानव का प्राण।

रूठे मन में प्रेम खिला दे, सूने मन में आस,
टूटे रिश्तों को जोड़ दे माता, बनकर विश्वास।

तेरे चरणों की धूल मिले तो, धन्य हो जीवन सारा,
तेरी कृपा की एक किरण से, मिट जाए तम सारा।

हे महालक्ष्मी इतना देना, मन कभी न हो लाचार,
घर में सुख हो, मन में शांति हो, अपनों का हो प्यार।

न धन इतना कि गर्व जगे, न अभाव सताए माँ,
जितना मिले उसे बाँट सकें, ऐसी बुद्धि दिलाए माँ।

कमल समान पावन कर देना, मेरे मन का द्वार,
जय-जय माँ लक्ष्मी भवानी, शत-शत तुझे नमस्कार।
2 महीने पहले
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