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हनुमान आज भी आते हैं

Shreya Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आज भी आते हैं हनुमान,
        
                                                    
                            
बस आँखें उन्हें पहचान नहीं पातीं।
जब हिम्मत टूटकर बिखरने लगती है,तब उनकी कृपा चुपके से साथ निभाती।

जब जीवन के सागर में,
हर नाव किनारा भूल जाती है।
तब पवनपुत्र की एक मुस्कान,डूबती साँसों को राह दिखाती है।

जब झूठ का शोर बहुत बढ़ जाए,सच बोलना कठिन हो जाए।
तब बनकर अडिग साहस,
हनुमान हर हृदय में समा जाएँ।

कभी किसी भूखे की रोटी बनकर,कभी किसी रोते का आधार।
कभी किसी माँ की प्रार्थना बनकर, कभी किसी बच्चे का संसार।

वे केवल पर्वत उठाने वाले नहीं,मन का बोझ भी हर लेते हैं।
जो राम-नाम को हृदय में बसाए,उसके भय पलभर में हर लेते हैं।

जहाँ सेवा बिना स्वार्थ के होती,जहाँ प्रेम बिना शर्त के मिलता है।
जहाँ वचन निभाने की मर्यादा हो,वहीं बजरंगी का दीपक जलता है।

न सोने का सिंहासन माँगा,
न यश का कोई सम्मान।
बस राम नाम की धड़कन बनकर,कर दिया जीवन महान।

आज भी आते हैं हनुमान,
बस स्वर बदलकर आते हैं।
कभी गुरु बनकर राह दिखाते,कभी मित्र बन मुस्काते हैं।

आओ ऐसा मन मंदिर रचें,
जहाँ छल का कोई द्वार न हो।
हर श्वास में केवल राम बसें,
और हर कर्म में हनुमान का सार हो।
2 महीने पहले
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