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गणपति को मोदक खिलाओ

Shreya Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आओ मिलकर बप्पा को, प्रेम से मोदक खिलाओ,
        
                                                    
                            
मन के सारे भाव सजाकर, चरणों में शीश झुकाओ।
केसर वाली खुशबू लेकर, थाली आज सजाओ,
गणपति के प्यारे मुख पर, प्रेम भरी मुस्कान लाओ।

घी में भुने मीठे मेवे, नारियल संग मिलाओ,
गुड़ की मीठी चाशनी घोलो, मोदक खूब बनाओ।
एक मोदक तुम प्रेम का रखना, दूजा श्रद्धा लाओ,
तीजा अपने मन की इच्छा, बप्पा को बतलाओ।

बप्पा विघ्न विनाशक हैं, हर संकट हर जाएंगे,
सच्चे मन से जो पुकारे, उसके पास चले आएंगे।
रिद्धि-सिद्धि के दाता बप्पा, खुशियों से घर भर देंगे,
सूनी राहों में भी बप्पा, आशा के दीप धर देंगे।

बच्चे लेकर थाल खड़े हों, बप्पा मोरया गाओ,
ढोल बजाओ, शंख बजाओ, मंगल गीत सुनाओ।
जिस घर में गणराज पधारें, वो घर धाम बनाओ,
भक्ति के इन पावन पलों में, प्रेम के दीप जलाओ।

पहला मोदक बप्पा के नाम, दूजा उनके प्यार का,
तीजा हर उस रिश्ते के नाम, जो हो सच्चा संसार का।
मीठे मोदक संग मीठा रखो, अपने मन का भाव,
बप्पा के चरणों में रख दो, जीवन के हर घाव।

आओ मिलकर बप्पा को, प्रेम से मोदक खिलाओ,
मन के सारे भाव सजाकर, चरणों में शीश झुकाओ।
माँ गौरी के लाल को आज, प्रेम से गले लगाओ,
मोदक की मिठास बाँटकर, जीवन भी मीठा बनाओ।
एक घंटा पहले
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