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कैमरे में क़ैद बचपन

Shreya Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            एक तस्वीर में हँसी ठहरी,
        
                                                    
                            
दूजी में शरारत मुस्काई।
कैमरे ने पल तो बाँध लिए,
पर उम्र कहाँ रुक पाई?

मिट्टी वाले छोटे पाँव थे,
बारिश में कागज़ की नाव ,
माँ की गोदी, बाबा की बातें,
हर शाम नई इक छाँव l

न रूठने की कोई वजह थी,
न मनाने का हिसाब ।
आँसू भी पल भर के मेहमान,
हँसना ही अपना जवाब ।

वो टूटी गुड़िया, वो कंचे,
वो छुपन-छुपाई की शाम।
हर तस्वीर अब पूछ रही है-
याद है अपना वो नाम?

कैमरा बस चेहरा रख पाया,
दिल की धड़कन रख न सका।
वक़्त की तेज़ रफ़्तार के आगे,
बचपन को वह रोक न सका।

अब जब एल्बम खुल जाती है,
आँखों में सावन भर आता।
एक छोटा-सा मुस्काता चेहरा,
दिल को फिर बच्चा कर जाता।

काश! समय भी कैमरा होता,
हर खुशबू को कैद कर लेता।
माँ की लोरी, नानी की बातें,
हर लम्हे को अमर कर देता।

तस्वीरें केवल रंग नहीं हैं,
ये बीते कल की धड़कन हैं।
कैमरे में जो क़ैद हुआ है,
वो सिर्फ़ बचपन नहीं...
हमारी सबसे सुंदर धरोहर है।
3 महीने पहले
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