वक़्त बदलता गया, मगर मैं तुम-सा होता गया,
मेरे लहू में, तुम्हारे लहू का अक्स आता गया।
तुम मेरे पास रहो या मीलों दूर, कहीं लेकिन,
हमेशा मेरी साँसों में, तुम्हारा मुश्क समा गया।
जब देखा लोगों ने, उनकेे संग आते-जाते मुझे,
दोस्तों में भी, शको-सुब्हा और रश्क आ गया।
उनके कूचे से आना-जाना, राह की जरूरत है,
बेसब्र रिंदों में चर्चा है कि, हमें इश्क़ हो गया।
पहली या आख़िरी बार रोया हूंँ जब उसने रुलाया,
एक उसी की ख़ातिर, मेरा हरेक अश्क बह गया।