विज्ञापन

ताजमहल है और नदी है

shoib

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            राजा मर गया सेना मर गयी
        
                                                    
                            
ख़त्म कहानी हो गयी सारी
हो गया गुम मयूंर सिहासन
महल क़ी शोभा खो गयी सारी

राज रहा न पाट रहा अब
दास रहे न ठाट रहा अब
गौतवशाली युद्ध क़ी यादें
समय का दीमक चाट रहा अब

ज़ेहन मे हाथी पैदल घोड़े
धुंधले हो गए थोड़े थोड़े
तीर कमा तलवार और ढाल
टूट गए ये सारे जोड़े

शेष यही उस युग क़ी छवि है
ताजमहल है और नदी है
-साहिल काज़मी
एक वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all