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ताजमहल है और नदी है

                
                                                         
                            राजा मर गया सेना मर गयी
                                                                 
                            
ख़त्म कहानी हो गयी सारी
हो गया गुम मयूंर सिहासन
महल क़ी शोभा खो गयी सारी

राज रहा न पाट रहा अब
दास रहे न ठाट रहा अब
गौतवशाली युद्ध क़ी यादें
समय का दीमक चाट रहा अब

ज़ेहन मे हाथी पैदल घोड़े
धुंधले हो गए थोड़े थोड़े
तीर कमा तलवार और ढाल
टूट गए ये सारे जोड़े

शेष यही उस युग क़ी छवि है
ताजमहल है और नदी है
-साहिल काज़मी
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एक वर्ष पहले

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