विज्ञापन

अतीत की स्मृति में चेहरों का दरपन

Shivkant Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अतीत की स्मृति में चेहरों का दरपन
        
                                                    
                            
रिश्तों के घावों पर वक्त का मरहम
समय की कीमत पर स्वार्थों का मूल्य
और भी बहुत कुछ कहता नीरव मन।

उम्र के पड़ावों पर दायित्वों में जड़े
स्वप्नों के शोर में विभोर चल पड़ा
न जीत की खुशी व हार का भय लिये
अतीत से जो मिला संग वो ले चला।

धैर्य की धरा पर पथ के हर शूल को
स्नेह के सुमन सा हार में पिरो दिया।
सफ़र में किससे कहते मन की व्यथा
बहते अश्कों ने अधरों को रोक दिया।

भावों की करवट पर दिल की धड़कन
कभी वक्त की साख पर तौलता संयम
आईने में ओझिल उन वेदनाओं को
कोई तो बतला दे नियति के भी नियम।
-शिवकांत
2 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Updesh Kumar

13403 कविताएं

View Profile

Dr fouzia

6944 कविताएं

View Profile