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गुस्ताखियां..

Shivendra Mishra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            एक ख़्वाब पलते देखा है,
        
                                                    
                            
उसे आँखों में चलते देखा है।

पलकों की गुस्ताख़ी से मैंने,
उसे पानी से जलते देखा है।

तेरी ज़ुल्फ़ों के झरोखों से मैंने,
इक तूफ़ान निकलते देखा है।

कहेगा ये जमाना क्या तुझको
मैंने इसको बदलते देखा है
2 महीने पहले
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