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खास मुजरिम आपका ये बस दास है यारो! !

Shivcharan Dass

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कल तलक था चेहरा कहाँ वो आज है यारो
        
                                                    
                            
बदलता जा रहा जिन्दगी का अंदाज है यारो

बून्द सीपी में गिरी और बन गई मोती कोई
जो घास में शबनम बनी वही उदास है यारो

ज़ब जुदा होना ही है तो क्या करें मिलके उसे
कुछ नहीं सकते उसे वो मेहमाँ खास है यारो

कल तलक खाना खराब वो आज हैं शहंशाह
कब कहाँ क्या होगा किसे ये आभास है यारो

मैं मुक़ददर पढ़ रहा था हाथ के नक़्शे में ज़ब
कितना गहरा दे गया वो दिल का दाग है यारो

जब वफ़ा का नाम तक लेना यहाँ पर जुर्म है
खास मुजरिम आपका ये बस दास है यारो! !
एक घंटा पहले
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Rajan

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