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दिल नहीं दिमाग़

shivangi singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जाने वालें को कई बार रोका मैंने
        
                                                    
                            
हर बार दिया एक नया मौक़ा मैंने
वो मांग रहा था दुआएँ न मिलने की
ये पता लगते फ़िर कहाँ टोका मैंने

ख़ुद को कर पीछे दिया रास्ता उसे
अपनी ख़्वाहिशों का गला घोंटा मैंने
उसे था ही नहीं डर मुझे खोने का
इस बार दिल से नहीं दिमाग़ से सोचा मैंने
एक दिन पहले
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Aditya Mishra

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