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सब्र की भंडार रहती है

Shiv Shankar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तुम्हारे बिन मै मर जाऊँ
        
                                                    
                            
अगर तु ना नज़र आए
जमाने से बिछड़ जाऊँ
अगर तु ना नज़र आए
तेरे होने से हिम्मत,
सब्र की भंडार रहती है

तेरे संग ना जो जी पाऊ
तुम्हारे बिन मैं मर जाऊँ

तेरी आखों की सूरमा,
रंगते होठों से जीता हूं,
अगर तुमको ना ग़र पाऊ
तुम्हारे बिन मैं मर जाऊँ

कभी चाहूँ. मै तन्हा होश में
मदहोशी से जानम
अगर तुमको ना जो भाऊ,
तुम्हारे बिन मैं मर जाऊँ

शिवा तुझे चाहता दिन-रात
धड़कन सासों की भाती,
अगर तुमसे ना मिल पाऊ,
तुम्हारे बिन मै मर जाऊ.


 
एक महीने पहले
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