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कामकाजी महिलाएं

Shiv Poojan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मन में उड़ने की चाह लिए
        
                                                    
                            
मंजिलें, कांटों भरी राह लिए
चेहरे पर छोटी सी मुस्कान के पीछे कितना दर्द छिपाती है
ये कामकाजी माएं, परिवार का सारा बोझ उठाती हैं।

बस पकड़ने के चक्कर में, खाना भूल जाती हैं
बच्चों का टिफिन, पति का टिफिन, तैयार करने के बाद
जो बचता है, अपने लिए ले आती हैं
ये कामकाजी माएं, कितना दर्द छिपाती हैं।

अपनी नन्ही सी गुड़िया, दूसरों को सौंप आती हैं
खुद के अस्तित्व की लड़ाई में खुद को भूल जाती हैं
थकान इतनी होती कि , रात चुटकियों में निकल जाती है
ये कामकाजी माएं, कितना दर्द छिपाती हैं।
3 वर्ष पहले
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