अगर किसी को बार-बार अपनी अहमियत बतानी पड़े,
तो बेहतर है उसकी ज़िंदगी से चुपचाप दूर चले जाना।
क्योंकि समझाने से अच्छा है खुद समझ जाना,
क्योंकि समझाने से कोई समझ नहीं सकता,
और जो समझता है, उसे कभी कहना नहीं पड़ता।