तुम्हे याद करने से ही
मेरी आँखे भर है आती
तुम्हारा नाम लेकर मैं
तृप्त हो जाती हूँ
ऐसे जैसे मेरी कोई भी
इच्छा अधूरी ना हो
पता नहीं क्यों ?
मैं हार जाती हूँ
अपने आप को तुमसे
लड़ने के बाद भी
हालांकि मैं जानती हूँ कि
मैं जीत सकती हूँ
तुमसे पर मैं
जीतना नही चाहती
मैं हमेशा तुम्हे जीतते हुये
देखना चाहती हूँ
मुझसे पता नही क्यों ?
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