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भूल जाता हूँ

Shiddharth Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मुर्दों के शहर में
        
                                                    
                            
आवाज लगता हूँ।
कोई जिंदा नहीं
बार बार भूल जाता हूँ।।

गुजरता हु तो इन गलियों से
तेरी मुस्कराहट याद आती है।
शायद यही कारण है कि
गलती बार बार हो जाती है।।

बड़ी उम्मीद से
इक अच्छा सौदा लाया था।
पर अफ़सोस,
शहर में सन्नाटा छाया था।।
एक महीने पहले
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