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रात भर जुगनू बुनते रहे सूरज

Shelendra Shukla

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            रात भर जुगनू बुनते रहे सूरज होने का ख़्वाब,
        
                                                    
                            
भोर की पहली धूप ने माँगा जब उनसे हिसाब।
एक पल में चौंधा गईं वो दीवानी आँखें,
जब आसमां ने ओढ़ लिया सोने का हिजाब।
-शैलेंद्र शुक्ला"हलदौना "
1 सप्ताह पहले
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