मन में तू बसा है
मेरे मन में तू बसा है
पल पल हर पल
ढूंढूं कलकल
तेरा निशां कहां है
मन में तू बसा है
मेरे मन में तू बसा है
ये ख़ाली, रूखा सा
मौसम आया कैसे
राह में
भर जाता है पल पल
मेरा रोम रोम
इक आह से
आंख़ें मेरी खोजे तुझको
मन कसमसा है
मन में तू बसा है
मेरे मन में तू बसा है
देती थी जो राहत
प्रीत आज ख़ता
वो बन गई
जाने अनजाने में
एक ख़ताकार
मैं बन गई
इस रस्ते पे
सूनेपन की
मिली मुझे सज़ा है
मन में तू बसा है
मेरे मन में तू बसा है
कैसे कर लूं यारी
इस एकाकीपन के आलम से
रहना मुश्किल हो रहा
है दूर अपने बालम से
नागिन जैसे
ख़ामोशी से
रुत ने मुझे डसा है
मन में तू बसा है
मेरे मन में तू बसा है
पल पल हर पल
ढूंढूं कलकल
तेरा निशां कहां है
मन में तू बसा है
मेरे मन में तू बसा है
- शीतल अग्रवाल