विज्ञापन

विरासत-ए-हिन्दी की ख़ातिर, कलमकार लिखेंगे हिन्दी में।

SHAYAR CHANDERI

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हर इक भाषा से करते हैं हम प्यार लिखेंगे हिन्दी में
        
                                                    
                            
सीखेंगे सबसे थोड़ा थोड़ा वो सार लिखेंगे हिन्दी में।

हैं हिन्दू-मुस्लिम-सिख-ईसाई जिनकी अपनी भाषाएँ,
हम गंगा-जमुनी तहज़ीबों का प्रसार लिखेंगे हिन्दी में।

मोहब्बत क्या होती है आख़िर समझाने इस ज़माने को,
लौटेंगे फिर उस दौर में हम, इक तार लिखेंगे हिन्दी में।

अख़बारों का ही काम हुआ है केवल दहशत फैलाना,
भाईचारे की बात करे जो, अख़बार लिखेंगे हिन्दी में।

लिखेंगे गाथा संघर्षों की, घुट-घुट मरते यौवन की,
बिना तपे न सपना होता साकार लिखेंगे हिन्दी में।

सगा हुआ इस माटी का न जवानों से बढ़ कर कोई,
रणभेरी उन जाँबाज़ों की हुंकार लिखेंगे हिन्दी में।

हो रंक कोई या राजा हो, जो देश का अपने हुआ नहीं,
दीमक जैसे उन अपनों को, गद्दार लिखेंगे हिन्दी में।

खामोश न बैठे क़लम कभी, हो ऐसा जज़्बा कवियों में,
जो सच को उजागर करे सदा, वो विचार लिखेंगे हिन्दी में।

आधुनिकता संग संस्कृति ज़िंदा रहे नई पीढ़ी में
ज्ञान लिखेंगे अंग्रेजी में संस्कार लिखेंगे हिन्दी में

छल और कपट के खेल ने खंडित कर डाला भारत को,
जोड़ेंगे कण-कण भारत का, विस्तार लिखेंगे हिन्दी में।

एहसास तो हर इक भाषा में काग़ज़ पे उतर ही आते हैं,
विरासत-ए-हिन्दी की ख़ातिर, कलमकार लिखेंगे हिन्दी में।

 
20 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Aditya Mishra

1 कविता

View Profile

Ankit Kumar

10489 कविताएं

View Profile