झड़ जाते हैं पात,
कोई न जाता साथ,
समय चुरा ले जाय,
जीवन की सौगात,
कौन बचेगा मौत से,
किसमें है औकात,
जायेंगे सब छोड़ के,
फ़िक्र करें दिन-रात,
नींद न आए रात भर,
पलकों पर हो प्रात,
वैद्य कहेगा हो गया,
ज़ोर का हृदयाघात,
छिन जाते वरदान भी,
मिल जाती है मात,
'गुंजन' नाम संभाल,
रघुवर हर पल साथ,
--शशि भूषण मिश्र 'गुंजन'