अभी तो पूरी रात पड़ी है,
अंधियारे के साथ खड़ी है,
चुपके से कह गया है कोई,
दीप जला ले रात बड़ी है,
सुलग रही है चिता युद्ध की,
दुर्दिन जग पर आन पड़ी है,
भौगोलिक दुनिया पे संकट,
सबकी सबसे जुड़ी कड़ी है,
काम, क्रोध, लोभ के आगे,
मोह व्याधि की मूल जड़ी है,
है अज्ञान समस्या की जड़,
मनमानी से बात बढ़ी है,
'गुंजन' बचना व्यर्थ रार से,
हरिहर से सब हरी-भरी है,
--शशि भूषण मिश्र 'गुंजन'