विज्ञापन

शब्दों का सम्मान

श्री सनातन

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            शब्दों का सम्मान जहाँ, संस्कृति वहाँ सँवरती है,
        
                                                    
                            
मधुर वचन की छाँव तले, हर पीड़ा भी झरती है।

शब्दों से ही प्रेम-पुष्प का उपवन महकाया है,
शब्दों ने ही मानव को मानव होना सिखलाया है।

कटु वाणी की अग्नि सदा संबंधों को जलाती है,
मीठी बोली पत्थर-सी संवेदना पिघलाती है।

शब्दों में आशीष बसे, शब्दों में अभिशाप भी,
इनसे बनते सेतु नए, इनसे उपजे संताप भी।

वाणी का संयम ही तो जीवन का श्रृंगार बने,
हर संवाद करुणा, ममता और सद्भाव से भरे।

धन, वैभव, पद सब मिट जाएँ, यश भी क्षणिक निशान,
अमर वही जिसकी धरोहर — शब्दों का सम्मान।
-सनातन मुकुंद
3 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all