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सच्चा मित्र है तो ज़िंदगी है

श्री सनातन

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सच्चा मित्र जहाँ मिलता, जीवन पाता चिर-आलोक।
        
                                                    
                            
मैत्री ऋत-ज्योति बन उतरती, खुलते अंतर के लोक॥

जब संशय-तम घिर आता, प्रज्ञा-दीप स्वयं जलता।
मौन-स्नेह के स्पर्श मात्र से, अंतःचेतन निर्मल होता॥

सुख में विनय, विपदा में धैर्य, एक समभाव-विधान।
मित्र नहीं केवल संसर्ग, वह आत्मा का मौन प्रमाण॥

वह निःस्पंद-चित्त में चैतन्य-बीज, सहज ही बो देता।
शुष्क हृदय-धरा सींचकर, करुणा-वन महका देता॥

जहाँ सत्य, विश्वास, समर्पण, वहीं मैत्री का परं धाम।
'तत्त्वमसि' का बोध, 'सोऽहम्' का निष्कलुष विश्राम॥

जीवन यदि भव-सागर है, मित्र बने अचल पतवार।
उसके संग भय गल जाता, जागे साहस अपरंपार॥

मैत्री ईश्वर का स्पर्श है, करुणा का पावन अभिषेक।
सच्चा मित्र है तो ज़िंदगी, शेष सभी मात्र अभिलेख॥
- सनातन मुकुंद
4 घंटे पहले
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