प्रेम की ये वादियाँ, मन की कहानी हैं,
हर शिखर पर धूप-सी, यादें पुरानी हैं।
चाँदनी की चूनरी में, रात मुस्काती है,
झील-सी आँखों में कोई, बात आती है।
पवन छूकर लताओं को, संदेश देती है,
हर पंखुरी अधरों पर, प्रीत रख देती है।
बादलों की ओट से जब, चाँद झाँकता है,
मन अनजान धुन पर, स्वयं नाचता है।
पगडंडियाँ दो हृदयों को, एक करती हैं,
दूरियाँ भी पास आकर, राग भरती हैं।
झरनों की रुनझुनों में, प्रीत बहती है,
मौन की वीणा स्वयं ही, गीत कहती है।
तुम मिलो तो हर दिशा में, रंग खिलते हैं,
तुम बिछड़ो, नयन सावन-सा बरसते हैं।
प्रेम केवल साथ चलना, बात इतनी नहीं,
दो दिलों का एक होना—प्रेम की रीत यही।
- सनातन मुकुंद