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ख्वाहिशों को जताना छोड़ दिया हमने

Shanti Swaroop

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जो मिल जाए समझता हूँ किस्मत अपनी
        
                                                    
                            
अब ख्वाहिशों को जताना छोड़ दिया हमने
बहुत कुछ सीखा है हमने अपनों से दोस्तों
हर किसी से दिल लगाना छोड़ दिया हमने
अब समझता नहीं कोई भी किसी के रंजोग़म
अब किसी को दर्द बताना छोड़ दिया हमने
दुनिया से मिले हैं हमको बस धोखे ही धोखे
अब फिर फिर से आजमाना छोड़ दिया हमने
ज़रूरतें थीं तब तक हम खुदा थे उनके लिए
अब ऐसों को मुंह लगाना छोड़ दिया हमने
जो हर कदम पे सोचते हैं गिराने की तरकीबें
उनसे अब दोस्ती निभाना छोड़ दिया हमने
बहुत कुछ सह लिया और भी सह लेंगे 'मिश्र'
पर आफतों से सर झुकाना छोड़ दिया हमने
-शांती स्वरूप मिश्र
एक महीने पहले
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