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हर चीज़ बिकती है

Shanti Swaroop

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अजब दुनिया है यारो, यहाँ हर चीज़ बिकती है
        
                                                    
                            
यहाँ सम्मान बिकता है, यहाँ तहजीब बिकती है
बिकता है सुबह से शाम तक अब इंसान मंडी में,
आती है रात सोने को, मगर यहाँ नींद बिकती है
न रहा किसी की आँखों में अब ईमान का पानी,
यहाँ आदमी तो आदमी, लोगों की भीड़ बिकती है
न खुदा का खौफ है अबतो न शर्मो हया है बाक़ी,
यहाँ मतलबों की ख़ातिर, गुणी की जीत बिकती है
गर हाथों में है पैसा तो किताबों से क्या लेना देना,
इधर दौलत के बदले में, हरएक तालीम बिकती है
कोई कितना भी कहे कि न बिकने देंगे अपना देश,
हर रोज़ उनके हाथों से, वतन की जागीर बिकती है
बाक़ी नहीं है कुछ भी इधर जो न हो बिकाऊ "मिश्र",
छोडो परगनों की बातें, यहां तो तहसील बिकती है
-शांती स्वरूप मिश्र
2 महीने पहले
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