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गिला कुछ नहीं

Shanti Swaroop

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मुझे दुनिया से यारो, गिला कुछ नहीं
        
                                                    
                            
मुक़द्दर था मेरा कि, मिला कुछ नहीं

बदल गए वो, जिन्हें समझा था अपना,
अब तो जीने के वास्ते, बचा कुछ नहीं

हर तरफ फैला है, खिज़ाओं का मौसम
कब लौटेंगी फिर बहारें, पता कुछ नहीं

जो तोड़ते हैं दिल, बस खिलौने की तरह,
ऐसे मुजरिमों की यारा, सजा कुछ नहीं

दिल की तपन को, छुपा के रखिये 'मिश्र',
दुनिया में ऐसे मर्ज़ की, दवा कुछ नहीं
-शांती स्वरूप मिश्र
एक महीने पहले
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