मेरे जज़्बात को समझो
मेरे बात को समझो
बेकरार बेसहाय मैं
मेरे हालात को समझो
बीते पलों को याद कर
उस रात को समझो
स्वर्ग सा सुंदर अपना महल
उस हालात को समझो
शंभु नाथ "सुमन"
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