तुम पैदा हुये
तुम्हारी उम्र थोड़ी बढ़ी
तुम्हें स्कूल भेजा गया
तुम पढ़े, तुम बड़े हुये
तुमने पैसे कमाए
अपनी सारी किताबों के
दाम से भी बढ़कर
कई गुना ज़्यादा
इस तरह तुमने
किताबों और स्कूल
को परिभाषित किया
और आख़िरकार बने
एक समझदार नागरिक
तुम्हारी सोच
तुम्हारे अनुभव
बहुत बढ़ गये हैं अब
जीवन को
देखा, सहा
महसूस किया है तुमने
जब तुम्हारी ज़ेब
पैसों से भर गई
तुमने जीवन को
रेखांकित किया
पैसे ने तुम्हें धकेल दिया
दुनियाँ की भीड़ में
सिक्कों से लेकर रूपयों
तक का
मूल्यांकन करने के लिये
इस तरह तुम्हारी गिनती
इंसानों में होने लगी
फिर एक दिन
तुमने संस्कृति, दुनियादारी
अकाँक्षाओं का बोझ
अपने बच्चे के बस्ते में भर
उसे स्कूल भेजा
बस्ता बहुत भारी हो गया है
तुम्हारे वाले बस्ते से भी ज़्यादा भारी
इन भारी बोझों से
बेचारे बच्चे का कंधा
मज़बूत होने से पहले ही
टूट गया है
गुलाबी ठंड में
छत पर रंग बिरंगी
पतंगों की ऊर्जा
कंधों पर कैसे समेटते हैं
नहीं जानता बच्चा
उसने तो अपनी
हिन्दी की किताब में
'प' से पतंग पढ़ा है
स्कूल बस की
खिड़की से हवा को
उसने कई बार
निमंत्रण दिया
कि काश
उसके हिस्से में भी
एक पतंग आती
जिस पर अपनी सारी
अनकही बातें, सपने
अपनी हँसी से लिख
पतंग से अर्जी भेज देता
रंगीन पतंग आसमानी
बादल को कैसे भेदेगी
इसका आकलन
बस के घूमते पहिये
भला क्या कर पाएँगे
पहियों ने तो सिर्फ़
कम समय में
ज़्यादा से ज़यादा दूरियाँ
तय करनी सीखी हैं
बच्चे की भूख
टिफ़िन बॉक्स
के अन्दर क़ैद है
जब घंटी बजेगी
बच्चा अपना
टिफ़िन बॉक्स खोलेगा
ब्रेड पर लगे जैम
के चटकारे मार-मार
अपनी उँगलियों में लगे
जैम से अपनी बची
लिपटी मनोदशा
सपने को
आँखें बँद कर चखेगा
एक ऐसा सपना
जिसके बारे में उससे
किसी ने नहीं पूछा
उसने कहना चाहा भी तो
उससे कहा गया
सपने को पूरा करने के लिये
पढ़ना बहुत ज़रूरी होता है
उससे भी ज़्यादा ज़रूरी है
अपने स्कूल के साथ
ताल से ताल मिलाकर चलना
बाकी बच्चों जैसा
अच्छे नंबर से पास होना
उन सारी बातों
चीज़ों का अनुकरण करना
जो उसके गले में बँधी
टाई और बैच को
सलामत रखेगी
क्रांतिकारी बनना
जघन्य अपराध है
स्कूल में इतिहास पढ़ने की
स्वतंत्रता मिलती है
लिखने का दुस्साहस
स्कूल की दीवारों को
काला कर देगा
अंग्रेज़ी की क्लास में
प्योर अंग्रेज़ी बोलना
और मैथ्स की क्लास में
अपने दिमाग़ को
पूरी तरह तेज़ चलाना है
जो बच्चें अपनी समझ से
पीछे रह जाते हैं
उनके भविष्य की
सीमा नि:सन्देह
लिख दी जाती है
रिपोर्ट कार्ड में
बाकी हिसाब किताब
पेरेंट टीचर्स मीटिंग में
तय होते हैं
बच्चे इस तरह
पढ़ते रहते हैं
बढ़ते रहते हैं
एक क्लास को छोड़
दूसरी क्लास की ओर
आगे बढ़ने को अग्रसर
सच ही कहा गया है
कच्ची मिट्टी की तरह
होते हैं ये बच्चे
उन्हें जैसे गढ़ोगे वैसे बनेंगे
पर इतने बच्चों में
कोई एक बच्चा वाकई
पीछड़ जाता है
जब उसे लगने लगता है
उसकी चित्रकारी का
पन्ना दब रहा है
फट रहा है
भारी बस्ते के नीचे
वह खुद को
खोना नहीं चाहता
- शालिनी मोहन