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नहीं, हम में कोई अनबन नहीं है

Shakti

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            नहीं, हम में कोई अनबन नहीं है,
        
                                                    
                            
बस इतना है कि अब वो मन नहीं है।

तुझसे कोई शिकायत भी नहीं,
बस अब तेरा इंतज़ार करने का मन नहीं है।

तुझे लेकर कोई उलझन नहीं है,
उलझी हुई तो बस मैं हूँ…
और इन दिनों मैं
अपने आप को सुलझा रही हूँ।

तू बुरा नहीं था,
शायद मैं ही बहुत कुछ उम्मीद कर बैठी थी,
कुछ रिश्तों को उम्र भर का समझकर
कुछ पल बहुत दूर तक जी बैठी थी।

अब न तुझे खोने का डर है,
न तुझे पाने की कोई चाह…
बस अपने भीतर जो बिखर गया था,
उसे धीरे-धीरे समेट रही हूँ।

हमारे बीच कुछ टूटा नहीं है,
बस वो पहले जैसा जुड़ाव नहीं है…
तू अपनी जगह ठीक है,
मैं अपनी जगह लौट रही हूँ।

और सच कहूँ—
तुझे लेकर कोई उलझन नहीं है,
बस अब मुझे
खुद को समझने का मन है…
क्योंकि बहुत वक्त तक
मैं तुझे समझती रही,
अब थोड़ी सी
खुद को समझ रही हूँ।
23 घंटे पहले
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