एक खूबसूरत रिश्ता था तुमसे,
कुछ अधूरी बातें, कुछ अनकहे किस्से थे तुमसे।
न शिकायत रही, न कोई सवाल बाकी है,
बस दिल के किसी कोने में तुम्हारा ख़याल बाकी है।
कभी तुम्हें रोकने की ख़्वाहिश थी,
आज तुम्हें आज़ाद करने का हौसला है।
तुम्हें पाने की ज़िद अब नहीं रही,
बस जो था, वो खूबसूरत था —
इस बात से इनकार नहीं है।
कुछ लोग ज़िंदगी में साथ रहने नहीं,
ज़िंदगी का एक हिस्सा बनकर
हमेशा याद रहने आते हैं।
तुम अब आज़ाद हो…
और हम तुम्हारी यादों के साथ जीना सीख गए।