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जय जय हिंदुस्तान

Shailesh Mishra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जहाँ संकल्प वज्र बने, जहाँ साधना बने तलवार,
        
                                                    
                            
जहाँ ज्ञान बने विजय-पताका, गूँजे जय-जयकार।
जहाँ युवा अपने पराक्रम से, नव इतिहास रचाते हैं,
वही राष्ट्र के गौरव-स्तंभ, जग में यश फैलाते हैं।”

जहाँ भवानी की भक्ति बनी, रणभूमि की ललकार,
जहाँ शिवाजी के शौर्य ने, बदला युग का व्यवहार।
जहाँ सिंह-हृदय संकल्पों ने, शत्रु-दर्प दलवाया,
उस माटी ने वीर प्रसवकर, स्वाभिमान सिखलाया।

जहाँ चेतक की टापों में, स्वाधीनता की झंकार,
जहाँ प्रताप की प्रतिज्ञा थी, पर्वत-सी दृढ़ दीवार।
जहाँ तृण-तृण में तेज भरा था, कण-कण में अभिमान,
वहाँ पराक्रम ने लिख डाला, स्वतंत्रता का गान।

जहाँ सिंहनाद सुभाष का, सोते भाग्य जगाता था,
जहाँ क्रांति का मंत्र सुनाकर, जन-जन को उकसाता था।
जहाँ स्वतंत्रता के स्वप्नों पर, प्राणों का बलिदान,
वहाँ गूँजा था एक मंत्र—जय हिंद! जय हिंदुस्तान!

जहाँ जवानी ने हँसकर, मातृभूमि पर शीश चढ़ाया,
जहाँ क्रांति के दीवानों ने, सोया भारत जगाया।
जहाँ भगत, राजगुरु, सुखदेव का, अमर हुआ बलिदान,
वहाँ शहीदों की गाथा से, गौरवमय हिंदुस्तान।

जहाँ वीरांगना लक्ष्मीबाई, बनकर ज्वाला दहकी थीं,
जहाँ शत्रु की चुनौती पर, रणचंडी-सी महकी थीं।
जहाँ नारी के साहस ने, इतिहास नया गढ़ डाला,
उस झाँसी की रानी ने, पराधीनता को ललकारा।

जहाँ लौह-पुरुष के लौह-संकल्पों ने, बिखरे मोती जोड़े थे,
जहाँ अखंड भारत के हित, स्वार्थों के बंधन तोड़े थे।
जहाँ एकता बनी शक्ति, एक राष्ट्र बना पहचान,
उस पटेल के पुरुषार्थ से, गौरवमय हिंदुस्तान।

जहाँ विवेक की वाणी ने, निद्रित राष्ट्र जगाया,
जहाँ युवा-संकल्पों में, नवयुग का दीप जलाया।
जहाँ आत्मबल बना अस्त्र, चरित्र बना हथियार,
वहाँ विवेकानंद के वचनों ने, विश्व किया जयकार।

जहाँ हिमगिरि प्रहरी बनकर, नभ से बातें करता है,
जहाँ सिंधु चरण पखार रहा, सूरज नमन किया करता है।
जहाँ गंगा की पावन धारा, संस्कृति-अमृत बहाती है,
जहाँ शूरवीरों की गाथा, युग-युग तक दोहराती है।

जहाँ राम के त्याग की गरिमा, कृष्ण की नीति महान,
जहाँ बुद्ध की करुणा गूँजे, गूँजे वेदों का ज्ञान।
जहाँ अशोक के धम्म-चक्र से, विश्व शांति का संदेश,
वह भारत केवल भूखंड नहीं, ऋषियों का पावन देश!

यहाँ हिमालय का धैर्य अटल, यहाँ सागर का विस्तार,
यहाँ शहीदों के रक्त से, लिखी गई स्वर्णिम बहार।
यहाँ वीरों की हुंकारों से, गूँज उठे आकाश,
यह भारत है, यह भारत है—शौर्य, शक्ति, विश्वास!

नत मस्तक हो विश्व खड़ा हो, ऐसा हो भारत का मान,
ज्ञान-विज्ञान, शौर्य-साधना से, ऊँचा हो हिंदुस्तान।
जब तक सूरज चाँद रहेंगे, "प्रिंस" करेगा जयगान,
जय भारत! जय भारती! जय-जय हिंदुस्तान!
- शैलेश मिश्रा"प्रिंस"
2 घंटे पहले
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