महल मेरे ख़यालों का वो आबाद रखते है,
ना-शाद नहीं होने देते दिल शाद रखते हैं।
आते-जाते रहते वो मेरे ख़्वाबों के जहाँ में,
हसीं एहसासात दिल मेरा आबाद रखते हैं।
इश्क़-ए-मजाज़ी पे यक़ीं नहीं रखते चुनांचे,
ख़यालों में मोहब्बत की बुनियाद रखते हैं।
ख़यालों में अपनी अदम-मौजूदगी से वो,
दिल का गुलशन हर-दम आबाद रखते हैं।
मेरे दिल की दीवार-ओ-दर तस्वीरों से नहीं,
अपनी दिल-नशीं यादों से आबाद रखते हैं।
--- शैलेन्द्र भटनागर "शील "