झूठ के सहारे चलना मेरी फ़ितरत नहीं,
फरेब के साथ रहना मेरी आदत नहीं.
सच की राह कठिन है मानती हूँ पर
सच की राह पर चलने में मुझे कोई शर्मिंदगी नहीं.
नहीं चाहिए ऐसा साथ, जो हर दिन नए चेहरे बदलता हो,
जो झूठ पर झूठ और झूठ की चादर ओढे रखता हो.
मुझे वही रिश्ता चाहिए, जो हर हाल में सच्चा हो।
-शाहाना परवीन 'शान'